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जहाँ हृदय मे प्रेम (मुक्तक)

जहाँ हृदय में प्रेम अधर पर हो गुड़ -सी मीठी बोली  उत्सव नेह दया करुणा उस आँगन की है रंगोली  जिसकी लय व अलय में घुलती धैर्य सरीखी मृदु लाली, सतरंगी सपनों के सँग में प्राण वहाँ खेले होली

होली (घनाक्षरी)

घनाक्षरी रंग भरी पिचकारी अबीर गुलाल वारी मथुरा के अंगना में बही फगुनाई है। राधा के जो साँवरे हैं हुए आज बावरे हैं रंग अंग डारते जो देती वो दुहाई है। गोपियों के चित डोले कान्हा श्याम रंग घोले गोकुल की गलियों में मादकता छाई है। भीगा तन भीगा मन  भीगा वृंद उपवन भीगती हवा भी यहाँ आज होली आई है।

श्रद्धांजलि

2122     2122    2122    2122    चेतना क्यों हम सभी के वंद्य मन को  छल रही है    अब  द्रवित हो  वेदना भी  सुप्तता में  ढल रही है    शब्द के सम्राट थे वह काल कवलित हो गए जो-    अश्रु से पूरित धरा फि...

सावन

☔☔☔☔☔☔☔☔☔☔☔ १ - श्रृंगार रिम झिम मेघ छाय घटा  घनघोर रे मन भयो बावरा   चित भयो चोर रे सावन मन बन घूमें    पपीहा सरस हिय करें देख कैसेे     नचन जोर रे २ - विरह पिय दरस को  दिन कई ग...

समझ लेना

#मुक्तक 1222     1222     1222    1222 कड़कती धूप में   घिरता हुआ    बादल  समझ लेना कभी अपनी सजीली आँख का काजल  समझ लेना मैं'  तुझसे   दूर   होकर  भी  सदा ही   पास  हूँ   तेरे तू अपने अक्स से ल...

गढ़े नया भारत

#मुक्तक 1222         1222           1222            1222 बयाँ  होने लगी  लब  से  दबी  जो  बात  दिल  में है सभी  बीतें  समय की  सच  अभी सौगात दिल में है समय आया यहाँ पर अब नया इतिहास लिखने का- ग...

समझ लेना

#मुक्तक 1222     1222     1222    1222 कड़कती धूप में   घिरता हुआ    बादल  समझ लेना कभी अपनी सजीली आँख का काजल  समझ लेना मैं'  तुझसे   दूर   होकर  भी  सदा ही   पास  हूँ   तेरे तू अपने अक्स से ल...

साहित्य शीतल धार

#दिनांक-24/9/17 #मुक्तक 1222       1222         1222           1222 सुधा साहित्य  शीतल धार  जन जन में प्रवाहित हो सदा संवेदना    के भाव   मन मन में    समाहित हो अछूता   हो नहीं  इक- बाल भी    अपनी ...

बड़ी प्यारी बड़ी भोली

मुक्तक बड़ी प्यारी बड़ी भोली तू सबकी ही दुलारी है। गई ममता से है सींची कीे लाडों से सँवारी है। खिले तू फूल सी चमके सितारों सी जहाँ में यूँ- तुझे देखूँ  यही लगता गई नभ से उतारी है...

बाल बालिका भाव पथिक

#दिनांक- 7/10/17 हम बाल बालिका भाव पथिक  सर्व- स्नेह अंकुर खिलाएंगे अज्ञान तिमिर कर दूर मन में अनुपम ज्ञान ज्योति जलाएंगे हिय स्नेह संवेदना संचार हो  छल कपट दंभ उपचार हो - मानवता- क...

हिन्द की पावन धरा

#मुक्तक 2122   2122   2122   212 हिन्द की पावन धरा अब जल रही रार से आज क्यों झूठे हैं रिश्ते नेह के अधिकार से दीप्त सूरज भी यहाँ इक रूप है भगवान का आप भी निर्बल को बल दो भावमय उपकार से #प्रियं...