दिव्य ज्योतिर्मय है नभ,शक्तिरूप अवतार ये होकर सिंह सवार माँ, अद्भुत महि संहार ये त्रिनेत्री मुख तेज लिए,शीश मुकुट छवि धारिणी लेकर खड्ग भाल गदा,हे देवी जग तारिणी लाल वस्त्...
#दोहें मानव काया में जनम ,स्नेह प्रेम के संग। लोभ कुटिल सम आचरण, मानवता पर व्यंग। हुई प्रदूषित भूमिजा , हरियाली मुरझाय। कृत्रिम शोभा से सभी, जन मन को भरमाय।। रिश्ते नाते छूटत...