गीत बच्चे भूखे अकुलाते हैं घर में पसरी है बदहाली! मन विह्वल है सोच सोच कर कैसे होगी यह दीवाली.? कोई महलों की रंगत कर, कनक-कटोरी धोता है। चाँदी की चादर में लिपटा, ठाठ बाट से सोता ...
मज़हब ने जो सिखलाया है, वो अदबी सम्मान रहे। एक हाथ में गीता हो तो, दूजे में कुरआन रहे। त्यौहारों में मेल- जोल हो ,और खुशियों का हो डेरा जैसी होली हो हम सबकी , वैसा ही रमज़ान रहे। सार...