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तुम्हें पता है?

तुम्हे पता है? हर गुज़रते क्षणों को देख अनायास ही झुंझला जाती हूँ घड़ी की बढ़ती सेकेण्ड मिनट और घंटे की सुईयों के साथ बढ़ती चली जाती है मेरी खीझ, हताशा और मेरा रोष तब सहज ही भान होता है हताहत होती मेरी भावनाओं का निःसहाय मूक होती संवेदनाओं का कैसे.... आखिर कैसे तुम नहीं समझ पाते मेरी कही अनकही बातों को वक़्क्त चाहिये तुम्हें? अंततः किस बात के लिए वक़्क्त? - मुझे संभाल सको उसके लिए या मात्र एक नए छलावे को - गढ़ और बुन मुझपर आरोपित कर सको घर के खाली कमरों को देख ये ख्याल भी मन मे कौंध जाते हैं - कि खाली हो रहा है मेरे ख़ुशनुमा जज्बातों का खजाना हर खिसकते खोते पल के साथ एक ही ख्याल सच मन को रौंध जाता है की.......तुम नहीं वजह नहीं जानना मुझे या जानती हूँ...... किन्तु बेज़ान व शिथिल हो रहे मेरे देह  के भीतर का अबोध अचेतन मन नहीं स्वीकारना चाहता सत्य को नहीं स्वीकारना चाहता - सत्य के किन्हीं कारणों को ... वह तो केवल रुष्ट है व्याकुल है हताश संग निराश है जहां तुम हो सकते थे.... पर हो नहीं.... देहरी में सुने चप्पलों की कतार , घर के खाली कमरें , बेपरवाह घड़ी...

बीआरडी मेडिकल घटना(घुटती जानें)

#दिनांक- 13/8/17 #घुटती_जानें हो गई कितनी गोदे सूनी किसे कहे उन लालों का ख़ूनी जिन्हें संजोया गर्भ के आशय नौ महीनें जिसे सुलाया लल्ला लोरी गा रात रात भर लगा के सीने जिसकी सूरत , काया में- सुकून की साँसें भरता अपने लाल को देखा दम घुट घुट साँसें मरता इतनी नन्ही मौतों का कहो अपराधी कौन है आँखों देखा हाल सभी का , फिर भी निष्ठुर नगरी मौन है जाने कितनी मईया के आंखों के तारें दफ़न हुए माटी माटी राज हित मे जारी हाय....नीति की भाषा नित नित समझ न आती #प्रियंका_सिंह

हाइकु (बाल मुरारी कृष्ण)

#दिनांक -14/8/17 #शुभ_जन्माष्टमी #हाइकु 1    खुशी मनाओ       कन्हैया घर आयो        सोहर गाओ 2     मोर मुकुट      प्रभु भये प्रकट        मिटे संकट 3    माखन मिश्री      नयी नयी बाँसुरी        रीझे बिहारी 4       दीन दयाला        प्रगट कृपाला        भार संभाला 5    बर्फी मिठाई      कृष्ण जन्म बधाई        स्व बिसराई #प्रियंका_सिंह

ग़ज़ल (तिरंगा)

#दिनांक- 15/8/17 #स्वतंत्रता_दिवस_की_बधाई #ग़ज़ल 1222    1222  1222  1222 तिरंगे    नाम पर  कुर्बान है     यूँ जान अपनी ये रहे ऊँचा   वतन का ओहदा    है शान अपनी ये सुनो तुम पाक हो या चीन हो है वक़्त संभल जा यही पैगाम   देते है   न भूलो    मान    अपनी ये अगर ख़ामोश हम समझो न कमजोरी हमारी यूँ अभी है  जोर साहस से भरी  पहचान  अपनी ये इसी  माटी में जन्मे  है भगत  आज़ाद   जैसे जन हँसी के साथ दिए थे तब प्राण बलिदान अपनी ये रहा   रुतबा   हमारा   शांति प्रिय    देश के जैसा बढ़ाओ हाथ   दोस्ती का   यही ईमान    अपनी ये #प्रियंका_सिंह

वर्ण पिरामिड (सावन)

#दिनांक-  31/7/17 #विषय - सावन                   है                  वन                 सघन                उपवन            आया सावन           मृदुल    पावन       खिली   कली   सुमन               (1)                        ॐ                      भाय                     सुखाय                   स्व  हिताय                 श्रावण  आय                मन     भरमाय     ...

विधा चोका(सावन)

#दिनांक- 29/7/17 #दोहा #सावन सावन रंग हरा हरा  , मन आनंद समाय शिव की पूजा अर्चना, जीवन शुभ सोहाय भाय सावन शिव को जो,गूंजे जय जयकार आप प्रभु तो भोले है महिमा अपरंपार सावन में झूले पड़े , हिय पाखी बन जाय बरसे बदरा जो घनी , मन उमंग भर जाय हाथ मेंहदी से भरी, कुमकुम लाल सुहाय पिया दरस जो ना मिले, सावन तनिक न भाय #स्वरचित #प्रियंका_सिंह

दोहा(सावन)

#दिनांक- 29/7/17 #दोहा #सावन सावन रंग हरा हरा  , मन आनंद समाय शिव की पूजा अर्चना, जीवन शुभ सोहाय भाय सावन शिव को जो,गूंजे जय जयकार आप प्रभु तो भोले है महिमा अपरंपार सावन में झूले पड़े , हिय पाखी बन जाय बरसे बदरा जो घनी , मन उमंग भर जाय हाथ मेंहदी से भरी, कुमकुम लाल सुहाय पिया दरस जो ना मिले, सावन तनिक न भाय #स्वरचित #प्रियंका_सिंह