Posts

गाँव

                            #गीत                 #आधार_छंद_तांतक देश गाँव की मिट्टी सोंधी, मोहत मन हरियाली है खेतों के सब मेढ़ सजीले, धरती रूप निराली है सनन-सनन पुरवइयाँ चलती, म...

तुम जा सकते हो- निःसंदेश !

सांझ की मुंडेर पर बैठा अपने साज -ओ- सामान को समेटते हुए अस्त होने को तैयार सूर्य को संकुचित आँखों से निहारा था एकटक निहारने का क्रम द्विपक्षीय हो ये अनिवार्य नहीं न ही किसी ...

रिक्तता

वास्तव में नहीं होता कोई भी स्थान सम्पूर्ण रिक्त अपनी सारी शक्ति से भींच ली गई मुट्ठी के मध्य भी शेष रह जाता है सूक्ष्म से भी सूक्ष्म रूप में खाली एक भाग जिसे उसी समय भर रही ...

अभिलाषा

समय मिले तो.. दौड़ते हुए जीवन से निकाल लूँ एक क्षण निद्रा की मधु सानिध्य में सुस्ताने को कभी गंभीर, कभी बचकानी सरीखे की बातें खुद ही खुद से बतियाने को समय मिले तो... देख लूँ निथा...

समझ लेना

#मुक्तक 1222     1222     1222    1222 कड़कती धूप में   घिरता हुआ    बादल  समझ लेना कभी अपनी सजीली आँख का काजल  समझ लेना मैं'  तुझसे   दूर   होकर  भी  सदा ही   पास  हूँ   तेरे तू अपने अक्स से ल...

गढ़े नया भारत

#मुक्तक 1222         1222           1222            1222 बयाँ  होने लगी  लब  से  दबी  जो  बात  दिल  में है सभी  बीतें  समय की  सच  अभी सौगात दिल में है समय आया यहाँ पर अब नया इतिहास लिखने का- ग...

गुरु को प्रणाम

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏      गुरु को प्रणाम मेरा          विधा का न ज्ञान मुझे              न्याय कर न पाऊँ तो                    मुझे सिखलाइये 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏      लड़खड़ाती ...