अधुनिकता

#दोहें

मानव काया में जनम ,स्नेह प्रेम के संग।
लोभ कुटिल सम आचरण, मानवता पर व्यंग।

हुई प्रदूषित भूमिजा , हरियाली मुरझाय।
कृत्रिम शोभा से सभी, जन मन को भरमाय।।

रिश्ते नाते छूटते, छूट रहा है हाथ।
हुई यंत्र से मित्रता,दिखे सभी के साथ ।।

मैली माटी छोड़ कर , पाथर घर मे सोय।
सभ्य मनुज की आड़ में, सिमट गया हर कोय ।।

समाचार के नाम पर , मैल बेचते लोग।
दिखा रहें सब झूठ क्यों, पाले कुंठा रोग।।

#प्रियंका_सिंह

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