#बंद_भी_करो_ये_पत्थरों_की_बाजी

#बंद_भी_करो_ये_पत्थरों_की_बाजी

'अपने ही अपनों को तोड़ेंगे'
ये बातें हज़म नही होती..
हम भी उखाड़ सकते हैं ,
तुम्हारी जंघाओं और भुजाओं को
जो अगर हमे भारत माँ की कसम नही होती..
बंद भी करो ये पत्थरों की बाजी
ये वेतन तुम्हारे नाम भी हैं साथी..
अरे हमे तो साथ मिलकर -
दुश्मनो से लोहा लेना हैं
नाकि अपने ही सैन्यदल को -
रणभूमि में धोखा देना हैं
चंद पैसो की बात है प्यारे,
इस काले से धन का क्या करोगे?
अपने देश से विद्रोह का शिरोनाम ,
लेकर ही क्या तुम मरोगे?
अरे.....
दुश्मनो की गोलियां फिर भी हमे बर्दाश्त है
पर दुश्मनो की शक्लो में हम तुम्हे अपने आगे पाएंगे
इस सोंच से चोटिल होते हमारे अपने ही जज़्बात है
यारो....
हम तुम्हारी ही सुरक्षा में तत्पर सेना है
एक तुम्हारी सलामती के लिए ही तो
 हमें आखिरी सांस तक जीना हैं......

©प्रियंका सिंह

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