#दिनांक-26/8/17 सस्वर गायन - "#गणेश_वंदना" #दोहा काया उबटन से बने , आदिशक्ति के लाल गजमुख वरन गजानना, शोभित चंदन भाल मति कुबेर मारी गई, अपने धन इतराय गणपति लीला देखि जो, करनी पर पछताय चंद्र स्वरूप अहम भरा, श्वेत रंग जो पाय सूरत से सीरत भली, देवा पाठ पढ़ाय चरण वंदना मैं करूँ, माटी शीश टिकाय आप गणेशा को सदा, लडुअन भोग लुभाय देव गजानन गणपती, गौरी पुत्र गणेश तुम ही बुद्धिदाता हो, तुम ही हो प्रथमेश #प्रियंका_सिंह
#दिन- शनिवार 16/09/2017 #आधार - छंद वाचिक राधा (मापनीयुक्त) #मापनी – 2122 2122 2122 2 अथवा - गालगागा गालगागा गालगागा गा #समांत - आते <> #पदांत – क्यों [ गीतिका ] धर्म के ही नाम पर तुम घर चलाते क्यों ? पाप से भर प...
#दिनांक- 18/8/17 #रदीफ़ - मान जाइए #काफ़िया - आत #ग़ज़ल फ़ाइलुन मफ़ाइलुन फ़ाइलुन मफ़ाइलुन 212 1212 212 1212 हो हसीन इक मुलाकात मान जाइए आज इश्क़ की है' शुरुआत मान जाइए बस वफ़ा भरी सभी वा...
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